अंडा फेंकने की घटनाओं पर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
इस भाषण ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि तृणमूल इस बार चुनावी मैदान में आक्रामकता के साथ-साथ संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखना चाहती है
कोलकाता। चुनावी रण में जहां जुबानी जंग अपनी मर्यादाएं लांघ रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक अलग लकीर खींचते हुए राजनीतिक शिष्टाचार की मिसाल पेश की है। पानीहाटी की एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दो-टूक शब्दों में हिदायत दी कि भाजपा उम्मीदवार अभया की मां के खिलाफ किसी भी तरह की अशालीन टिप्पणी या व्यक्तिगत हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि चुनावी लड़ाई मुद्दों की होनी चाहिए, न कि किसी की व्यक्तिगत पीड़ा और पारिवारिक मर्यादा पर प्रहार की।
अभिषेक बनर्जी ने बेहद संवेदनशील रुख अपनाते हुए मंच से घोषणा की कि वह महिला उनकी अपनी मां के समान हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी पार्टी ने कभी भी इस तरह की निम्न स्तर की राजनीति नहीं सिखाई है। बनर्जी ने इस बात को रेखांकित किया कि संबंधित महिला ने अपना बच्चा खोया है और एक मां के रूप में उनकी पीड़ा असहनीय है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक दुख और मानसिक कष्ट में कोई भी व्यक्ति कभी-कभी गलत फैसले ले सकता है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उन पर राजनीतिक हमला किया जाए। अभिषेक का यह बयान सियासी गलियारों में एक संयमित और परिपक्व नेता की अपील के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने इस अपील पर तल्ख प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि उन पर पहले ही कई बार व्यक्तिगत प्रहार किए जा चुके हैं, ऐसे में अब चुनाव के बीच इस तरह की सहानुभूति दिखाने का कोई खास अर्थ नहीं रह जाता। इधर, सभा में अभिषेक बनर्जी ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना का जिक्र कर माहौल को गरमा दिया। उन्होंने न्याय की मांग को लेकर हुए आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्र और जांच एजेंसियों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के इतने समय बाद भी आरोपी को सजा नहीं मिली है और जांच की प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है। इसी दौरान अभिषेक ने ममता सरकार द्वारा लाए गए 'अपराजिता बिल' को लेकर भाजपा को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री से इस बिल को जल्द से जल्द मंजूरी दिलाने की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि इस बिल के कानून बनने से बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में महज 50 दिनों के भीतर दोषियों को कड़ी सजा दी जा सकेगी। उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टी दोषियों का सम्मान करती है, उससे न्याय की अपेक्षा करना व्यर्थ है। पानीहाटी, जो लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग माना जाता रहा है, वहां इस बार भाजपा ने भावनात्मक कार्ड खेलकर मुकाबले को त्रिकोणीय और कड़ा बनाने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिषेक बनर्जी का यह संयमित रुख और व्यक्तिगत हमलों से बचने की सलाह, दरअसल एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए वे न केवल महिला मतदाताओं के बीच अपनी छवि को सुदृढ़ कर रहे हैं, बल्कि भाजपा के इमोशनल कार्ड की काट भी मर्यादित व्यवहार से कर रहे हैं।
इस भाषण ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि तृणमूल इस बार चुनावी मैदान में आक्रामकता के साथ-साथ संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखना चाहती है।